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खरीद सकते हैं, आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी

Published: 2015-07-28 03:29 PM IST

 

जगदलपुर, 28 जुलाई   आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी खरीद सकते हैं। छत्तीसगढ़ राजस्व मंडल बिलासपुर के राजस्व पुनरीक्षण प्रक्ररण क्रमांक आरएन/01/आर/अ-21/323/14 के आदेश दिनांक 17/07/2015 को दिये गये निर्णय में अध्यक्ष राजस्व मंडल ने यह स्पष्ट कर, कलेक्टर जगदलपुर एवं आयुक्त बस्तर संभाग के आदेश को निरस्त करते हुए अपने आदेश में लिखा है कि नगरीय सीमा क्षेत्र में स्थित आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी के द्वारा क्रय करना विधि विरूद्ध नहीं है।
राजस्व मंडल ने यह भी स्पष्ट किया कि भू-राजस्व संहिता की धारा 165(6) जिसके तहत आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी नहीं खरीद सकते के संबंध में उक्त विधि की धारा कहां लागू होगी, इसे भी स्पष्ट करते हुए अपने आदेश में नगरीय अधिसूचित क्षेत्र में उक्त उपबंध लागू नहीं होता है। धारा 165 (6) अनुसूचित क्षेत्र के कृषि भूमि पर लागू होता है जिससे आदिवासी क ी जमीन गैर आदिवासी नहीं खरीद सक ते हैं। 
ज्ञात हो कि सचिव राजस्व एवं आपदा प्रंबंधन विभाग छग शासन रायपुर के द्वारा  दिये निर्देश को जिसमें आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी नहीं खरीद सक ते, यदि आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी द्वारा खरीदी गई तो उसे वापस आदिवासियों को सौंपने के निर्देश को कलेक्टर जगदलपुर एवं आयुक्त बस्तर संभाग के द्वारा भू-राजस्व संहिता के  नियम एवं अधिनियमों से परे जाकर स्वमेव पुनरीक्षण की कार्यवाही करते हुए आदिवासी  द्वारा गैर आदिवासी को विक्रय की गई जमीन को वापस आदिवासी को सौंपे जाने का तुगलकी आदेश जारी कर दिया था। जिसे माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में चुनौती दी गई थी। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अपने आदेश में उचित माध्यम से कार्यवाही करने का निर्देश देते हुए  राजस्व मंडल के समक्ष पुनरीक्षण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था जिसके तहत प्रस्तुत पुनरीक्षण में छग राजस्व मंडल बिलासपुर द्वारा उक्त आदेश पारित किया गया। 
आदिवासी की जमीन को गैर आदिवासी के द्वारा क्रय किये जाने संबंधी प्रक्र रण जिसे कलेक्टर जगदलपुर एवं आयुक्त बस्तर संभाग के द्वारा स्वमेव पुनरीक्षण के तथ्यों का सार कुछ इस प्रकार है-भू-राजस्व संहिता की धारा 165 (6)(क) के उपबंधों के अन्तर्गत तत्कालीन अतिरिक्त कलेक्टर जगदलपुर के न्यायालय में प्रचलित बाजार मूल्य पर आदिवासी की जमीन विक्रय की अनुमति प्रदान की गई, जिसके उपरांत आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी के द्वारा क्रय की गई। शासन स्तर में आदिवासी की जमीन गैर आदिवासियों के द्वारा क्रय किये जाने का मामला सुर्खियों में आने के बाद छग शासन के  सचिव राजस्व आपदा एवं प्रंबंधन विभाग के द्वारा यह निर्देश जारी किया गया कि  आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासी के द्वारा यदि क्रय किया गया है तो उसे आदिवासियों को लौटाई जाये। जिस पर प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा स्वमेव पुनरीक्षण प्रकरण दर्ज कर आनन-फानन में राज्य शासन की राजनैतिक मंशा को उपकृत करने और शासन के करीबी बनने के लिए भू-राज्यस्व संहिता के नियम एवं अधिनियमों को ताक में रखते हुए विधि विरूद्ध आदेश पारित कर दिया।
 प्रशासनिक अधिकारियों को यह ज्ञात होना चाहिए की शासन के निर्देशों से नियम एवं अधिनियम परिर्वतित नहीं होते अपितु देश में कानून का पालन विधि अनुरूप किया जाता है। प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने मातहत अधिकारियों को भी जिनके द्वारा विधिनुरूप किये गये कार्यों को भी शासन के निर्देश पर गलत ठहराते हुए बस्तर संभाग के तीन कलेक्टरों के विरूद्ध इसी मुद्दे पर विभागीय जांच संस्थित की गई, जिसे भी बाद में कानून की कसौटी में विधिनुरूप स्वीकार कर जांच समाप्त की गई। इस प्रकार की कार्यवाही से नगरिय जनता को अनावश्यक मुकदमे बाजी में फंसाकर परेशान किये जाने की कार्यवाही वाकई भत्र्सना योग्य है। प्रजातांत्रित देश में न्याय व्यवस्था नियम एवं अधिनियमों से संचालित होती है लेकिन वहां यदि राजनैतिक उद्देश्यों के लिए दिये गये निर्देश का दुरूपयोग प्रशासनिक स्तर पर अपने हित लाभ या राजनैतिक आक ाओं को खुश करने के लिए किया जाना, लोगों की मुसिबत का सबब बन जाता है। छग राजस्व मंडल बिलापुर के द्वारा पारित आदेश से यह स्पष्ट हो गया है कि नगरीय क्षेत्रों में स्थित नजूल भूमि / व्यपर्वतित भूमि पर  भू-राजस्व संहिता की धारा 165(6) लागू नहीं होते तथा नगरीय क्षेत्रों में आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी के द्वारा क्रय किया जाना विधिनुरूप है। 

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